Happy Deepawali

कुछ तेल जला ,कुछ बाती,
तब है रौशनी आती।
संघर्ष सिखाता दीपक,
घनघोर निशा जब आती।
कुछ दीप – दान में दे दें,
उम्मीद किरण से भर कर,
रश्मि कुछ ऐसे बिखरे,
जो आस ज्योति से आती।
ज्योति राय
‘जीवन ज्येाति’
लखनऊ

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थोड़ा टेढ़ा….

क्या सीखा इस चांद से?

थोड़ा टेढ़ा ,तो पूजनीय।

जब पूरा था तो ग्रसा गया गया।

ग्रहण लगा तो पूर्णिमा,

दूज, चौथ पूजा गया।

ये सीखा इस चाँद से,

संघर्ष अलग ,विराम अलग,

जीवन का हर दिन है भिन्न।

कुछ मन की, कुछ बेमन की,

पर सपने कभी न हो छिन्न- भिन्न।

जयोति राय, जीवन ज्योति.

सिसकी..

चारदीवारी के भीतर भी,
सिसकी है लाचारी है।
जब लांघी घर की ड्योढ़ी ,
उत्पीड़न और दुराचारी है।
कौन नयी सी बात उठी है,
इतिहास भरा है मी टू से,
वही द्रौपदी , वही है सीता,
बस इसकी – उसकी बारी है।

ज्योति राय, ‘ जीवन ज्येाति’
लखनऊ

लम्हें …

वो जो लम्हें हैं, कभी साथ हुआ करते थे,

रंग में रंग के ,तेरे साथ हुआ करते थे।

आज भी याद तेरी मुस्कान बन के आती है,

बात ही बात में , लड़ते थे हंसा करते थे।

ज्योति राय ‘ जीवन ज्येाति ‘

आज़ादी…

ये स्वतंत्रता महान है….🇮🇳
कितने सपूतों की बली ,
मातृभूमि पर चढ़ी ,
तब मिला सम्मान है ,
ये स्वतंत्रता महान है।
प्रगति पथ प्रशस्त हो ,
हर नागरिक आश्वस्त हो ,
प्रखर किरण के ओज सी,
हर आशा प्रचण्ड हो ।
आस तब साकार है,
ये स्वतंत्रता महान है।
उम्मीद पर खरे रहें,
ईमान पर डटे रहें,
देश के सम्मान हेतु ,
चट्टान से जमे रहें।
आस तब साकार है,
ये स्वतंत्रता महान है।

ज्योति राय ‘जीवन ज्योति ‘

लखनऊ

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